आज हम प्रिडिक्टिव और प्राइवेटिव मेंटिनेंस के बारे में जानेंगे
हमे अपने शरीर को लम्बे समय तक तंदुरुस्त और फुर्तीला बनाए रखने के लिए अपने शरीर का अच्छा से ख्याल रखना पड़ता है ताकि हम एक अच्छा और स्वस्थ जीवन जी सके।
उसी तरह मशीनें भी बिना रुके लगातार काम करती रहे इसके लिए हमें उनका वक्त वक्त पर रखरखाव करना होता हैं ताकि हमारे काम में कोई बाधा ना आए। इसके लिए हम कई तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं यहां पर हम उन्हीं तकनीकों में प्रिडिक्टिव और प्रिवेंटिव मेंटिनेंस के बारे में बात करेंगे।
० प्रिवेंटिव v/s प्रिडिक्टिव मेंटिनेंस –
ये दोनों तकनीक ही मशीन के रखरखाव के लिए उपयोग की जाती है बस दोनों को अलग अलग काम और मशीन के हिसाब से उपयोग किया जाता है जब तक हम यह दोनों होती क्या है नहीं जान जाते तब तक हम इनके अंतर को नहीं समझ पाएंगे तो चलिए पहले हम इन्हें समझने कि कोशिश करते है –
०प्रिवेंटिव मेंटिनेंस –
हमारे शरीर को बीमारी ना पकड़ ले इसके लिए हम हर छह महीने यह साल भर में जा कर अपना चेकअप करवाते है।
उसे तरह प्रिवेंटिव मेंटिनेंस में मशीन को तय समय – समय पर चेक किया जाता है ओर उसकी सर्विसिंग की जाती है जैसे कार के 30000km चलने पर उनकी सर्विस करना चाहे उसमें कुछ खराबी हो या नहीं।

० प्रिडिक्टिव मेंटिनेंस –
जब हम कभी अपने निरंतर चेकअप के लिए डॉ के पास जाते है तो डॉ हमारी ब्लड रिपोर्ट देख कर हमे बता देता है कि आगे आपको शुगर हो सकती है।
उसी तरह यह प्रिडिक्टिव मेंटिनेंस मशीन के अंदर भविष्य में कौन सा पार्ट कितने दिन में खराब होने वाला है यह बता देता है।
आशा है कि अब आप समझ गए होगे कि दोनों कि तकनीक मशीनों का रखरखाव करती है पर दोनों का तरीका अलग है कुछ छोड़े उद्योगों के लिए उपयोगों है तो कोई बड़े उद्योग के लिए।

० दोनों तकनीकों के उद्देश्य –
दोनों ही तकनीक हमारी मशीनों के रखरखाव के लिए है इनके अपने कुछ उद्देश्य है जो इस प्रकार है –
1 समय कि बचत
2 मशीनों की लम्बी आयु
3 उत्पादकता में वृद्धि
4 लागत में कमी
5 इंजीनियरों की मदद
० आइए अब हम दोनों में कुछ अंतर समझने कि कोशिश करते हैं –
1 प्रिवेंटिव मेंटिनेंस एक निवारक का कार्य करता है जैसे एक निश्चित समय के बाद पार्ट बदल देना।
प्रिडिक्टिव मेंटिनेंस में पहले से पता चल जाता है कि मशीन का पार्ट कब खराब होने वाला है तभी उनको बदला जाता है।
2 प्रिवेंटिव मेंटिनेंस में शुरुआती लागत कम होती है पर कभी कभी अछे पार्ट्स भी बदलने पड़ते है।
प्रिडिक्टिव रखरखाव में सेंसर्स की बजह से शुरुआती लागत ज्यादा होती है।
3 प्रिवेंटिव मेंटिनेंस में पार्ट्स समय से पहले बदले जो सकते है।
प्रिडिक्टिव मेंटिनेंस में पार्ट्स का पूरा इस्तेमाल होने के बाद ही बदला जाता है।
० दोनों में से कौन सा ज्यादा सस्ता और किफायती है????
इनका सस्ता होना और किफायती होना इस बात पर निर्भर करता है कि इनका इस्तेमाल हम कहा कर रहे हैं अगर आप छोटी मशीनों और छोटे उद्योग की बात करे तो उसके लिए प्रिवेंटिव रखरखाव सही है
लेकिन आप की बड़ा उद्योग कर रहे हैं आपकी मशीनें बड़ी है तो उसके लिए प्रिडिक्टिव रखरखाव अच्छा है
० चलो हम इनके खर्चो कि तुलना से जानने की कोशिश करते हैं
० प्रिवेंटिव मेंटिनेंस की लागत –
यह हमे शुरू शुरू में तो सस्ता पड़ता है पर आगे चल कर इसके कुछ छिपे खर्चे आने लगते है तो यह लम्बे समय में हमारे लिए महंगा साबित होता है। इसमें तय समय में मशीनों के पार्ट्स बदलने पड़ते है उनके बदलने की आवश्यकता हो या नहीं। और इस सब चक्कर में काम को रोकना पड़ता है जिससे उत्पादन भी बाधित होता है
० प्रिडिक्टिव मेंटिनेंस –
यह हमे शुरू में मंहगी लगती है क्यों कि इसमें सेंसर लगाने पड़ते है जो कि महंगे होते हैं पर आगे चल कर यह हमारे लिए किफायती साबित होती है। क्यों कि इसमें मशीनों के पार्ट्स को तभी बदला जाता है जब उन्हें बदलने की आवश्यकता होती है। और मशीनें भी बिना रुके लगातार काम करती रहती है।
निष्कर्ष –
निष्कर्ष में हम कह सकते है कि प्रिवेंटिव रखरखाव में हम आने वाली बीमारी से बचने के लिए निरंतर चेकअप करवाना।
शरीर में बीमारी के लक्षण दिखने पर उस बीमारी का इलाज करवाना।