नॉन डिस्ट्रिक्टिव टेस्टिंग मैथर्ड

By | 02/09/2026

आज हम नॉन डिस्ट्रिक्टिव टेस्टिंग मैथर्ड के बारे में चर्चा करेंगे चलो इसे हम अपनी आसान भाषा में समझे कि कोशिश करते हैं

हमे लंबे समय तक स्वस्थ बने रहने के लिए जिस तरह अपनी सेहत पर ध्यान देना जरूरी है उसी तरह मशीनें भी लम्बे समय तक बिना गड़बड़ी के काम करती रहे इसके लिए इनका भी ठीक रहना जरूरी है ।

जब कभी हमे अपने शरीर में कही कोई दर्द या दिक्कत समझ आती है तो हम डॉ के पास जाते है तब वह अंदर कहा क्या परेशानी है यह पता लगाने के लिए X- Ray किया जाता है। या फिर सोनोग्राफी कि जाती है।
उसी तरह से मशीनों में कहा गड़बड़ी है इसे पता लगाने के लिए भी कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है उसी में से एक है नॉन डिस्ट्रिक्टिव टेस्टिंग तो आगे हम इसके बारे में विस्तृत चर्चा करेंगे।

० नॉन डिस्ट्रिक्टिव टेस्टिंग –
यह एक ऐसी जादुई तकनीक है जो मशीन को बिना खराब किए उसने कहा क्या परेशानी है का पता आसानी से लगा लेती है। आइए इसे हम और आसान तरीके से समझते हैं। इसके लिए पहले हम डिस्ट्रिक्ट के बारे में जानते हैं।

डिस्ट्रिक्ट टेस्टिंग –
इसमें भी मशीनों में कहा क्या गड़बड़ी है का पता लगाया जाता है पर इसके बाद वह मशीन किसी काम की नही रह जाती क्योंकि इसमें मशीन को खोल कर पता किया जाता है कि क्या परेशानी है जिसकी बाद वह मशीन किसी काम की नही रह जाती।
पर डिस्ट्रिक्ट टेस्टिंग  में मशीन को बिना खोले ओर बिना खराब हुए उसके अंदर की खराबी का पता लगाया जाता है जिससे मशीन को आगे उपयोग किया जा सकता है। अब आप डिस्ट्रिक्ट टेस्टिंग को अच्छी तरह से समझ गए होगे अब आगे एन डी टी की मुख्य विधियां समझते है।-

एन डी टी की मुख्य विधियां –
एन डी टी के जरिए मशीनों को जांचने की कई विधियां है। जो इस प्रकार है।

1 अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग –
Ultrasonic testing (UT) इसमें ध्वनि तरंगों का उपयोग करके टेस्टिंग की जाती है इसमें उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को मशीन के अंदर भेजा जाता है ओर अगर तरंगों में किसी प्रकार की रुकावट या बदलाव होता है तो उससे हमे अंदर की खराबी का पता चल जाता है।

० कैसे होता है –
इस तकनीक में हमे अल्ट्रासोनिक तरंगें सुनाई नहीं देती जहां मशीन में कुछ गड़बड़ी होती है वह वहां से टकराकर वापिस लौट आती है जो स्क्रीन पर इंजीनियर को दिखाई देती है और मशीन की खराबी का पता चल जाता है।

2 रेडियोग्राफिक टेस्टिंग –
Radiographic testing ( RT)इसमें गामा किरणों का उपयोग करके धातु के अंदर की दरारों का पता किया जाता है।

० कैसे होता है –
यह तकनीक बिल्कुल x -ray
कि तरह काम करती है इसमें वस्तु के एक तरफ रेडियो वेव डाली जाती है और दूसरी तरफ डिजिटल डिटेक्टर रखा जाता है अगर मशीन के अंदर कोई क्रैक या खाली जगह होती है तो फोटो में उसकी काली परछाई दिख जाती है।

3 तरल पेनिट्रेंट टेस्टिंग –
Liquid penetrant testing ( PT)इस टेस्टिंग में एक विशेष प्रकार के तरल का उपयोग किया जाता है जो सतह पर खुली दरारों का पता लगाने के काम आती है।

० कैसे होता है –
इसमें एक खास तरह की डाई लगाई जाती है जो दरारों के अंदर चली जाती है। फिर अतिरिक्त डाई साफ कर देते है इसके बाद डेवलपर छिड़का जाता है जो दरार के अन्दर की डाई बाहर आ जाती है और दरार साफ दिखाई देती है।

4 चुम्बकीय कण टेस्टिंग –
Magnetic partical (MT)
इस तकनीक का उपयोग केवल लोहे कि धातु से बनी संरचना में खराबी का पता लगाने के लिए किया जाता है।

० कैसे होता है –
इसमें वस्तु में चुंबकीय क्षेत्र पैदा किया जाता हैं और उस पर लोहे का बारीक पाउडर छिड़का जाता है अगर सतह पर कोई दरार होगी तो पाउडर वहां चिपक जाएगा।

5 देख कर जाँच करना –
Visual testing ( VT) इसमें दूरबीन से देख कर धातु की दरारों या अन्य समस्या का पता किया जाता है।

० कैसे होता है –
निरीक्षक आंखों से आवर्धक लेंस या दूरबीन की मदद से धातु कि दरारों या जंग का पता लगाया जाता है।

6 विद्युत चुंबकीय जाँच –
Eddy current testing ( ET) इस जांच में बिजली संवहन पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है।

० कैसे होता है –

इसमें वस्तु में हल्की बिजली की तरंगे पैदा की जाती है अगर अंदर कोई मोटाई में बदलाव होता है तो बिजली का प्रवाह बदल जाता है जिसे मीटर पकड़ लेता है।

० स्थिति के हिसाब से कौन सा तरीका उपयुक्त है –
हर स्थिति में आप एक की तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर सकते यह तो इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस चीज की जाँच के रहे है उस हिसाब से मैथर्ड का उपयोग किया जाता है

1 वस्तु के अंदरूनी कमी को ढूंढने के लिए बेस्ट –
अगर हमे किसी वस्तु की बहुत गहराई की दरार या खराबी का पता लगाना है तो उसके लिए अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग या रेडियोग्राफिक टेस्टिंग का इस्तेमाल किया जाता है जो दरार बाहर से नही दिखाई देती उसके लिए इसका उपयोग किया जाता है यह हमे बहुत सटीक जाँच प्रदान करता है।

2 सतह की बारीक दरारों के लिए –
यज तकनीक बहुत किफायती है अगर हमे सिर्फ ऊपर की सतह की दरार को ढूंढना है तो उसके लिए लिक्विट टेस्टिंग और मैग्नेटिक टेस्टिंग सबसे उपयुक्त है।

3 बजट और प्राथमिक जाँच के लिए –
यह हमारे लिए बजट में आने वाली तकनीक है अगर हमने अभी वस्तु का उपयोग किया है और उसमें कुछ गड़बड़ी है तो उसके लिए शुरुआती जाँच के लिए विजुअल टेस्टिंग सबसे उपयुक्त है।

निष्कर्ष –
अलग अलग काम और वस्तु के हिसाब से सभी मैथर्ड उपयुक्त है पर आधुनिक युग में अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग सबसे बेस्ट मानी जा रही है। इन सब तकनीकों ने मशीनों की लागत को कम कर दिया है ओर उत्पादकता में वृद्धि की है।

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