क्वालिटी कन्ट्रोल टूल्स इन मैन्युफैक्चरिंग (7 टूल्स)

By | 04/09/2026

आज हम उत्पादन में क्वालिटी कन्ट्रोल टूल्स के बारे में जानेंगे
सोचिये अप अपने घर अपने बच्चे के लिए एक कार मंगवाते है और डिब्बा खोलने पर कार का एक पहिया छोटा और टूटा निकलता है
तो आपके बच्चा उदास हो जाएगा और उसे उदास देख आप, और आप कंपनी के रिव्यू भी खराब दोगे जो कंपनी का नाम खराब करेगी इससे बचने के लिए और उपभोक्ता को गुणवत्ता पूर्ण समान पहुंचाने के लिए ,
कंपनी गुणवत्ता की जाँच करती है और उसकी लिए कुछ तकनीक का उपयोग करती है उन्हें ही गुणवत्ता नियंत्रक टूल्स कहते हैं आगे हम इनकी विस्तृत चर्चा करेंगे।
सबसे पहले हम विनिर्माण ( manufacturing)के बारे में जानेंगे???

०विनिर्माण manufacturing
विनिर्माण को हम आसान शब्दों में कहे तो यह उत्पादन है कच्चे माल से श्रम, मशीनों कि मदद से उपयोगी व बहुमूल्य वस्तु का निर्माण करना ही विनिर्माण कहलाता है।

अब आप विनिर्माण को अच्छी तरह से समझ गए होगे अब हम क्वालिटी कन्ट्रोल को समझने की कोशिश करते हैं

क्वालिटी कन्ट्रोल –
यह वह प्रकिया है जिससे विनिर्माण से उत्पादित वस्तु या सेवा की कमियों को जांचा और सुधारा जाता है ताकि वह तय मानकों और उपभोक्ता के मान दंडों पर खरा उतर सके।

 

० क्वालिटी कन्ट्रोल के लिए कुछ तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें हम 7 QC (quality control) कहते है आइये इनके बारे में जानते हैं –

०7 क्वालिटी कन्ट्रोल टूल्स ०

1 चेक शीट-
यह एक चार्ट के रूप में शीट होती है इसमें डाटा इकठ्ठा किया जाता है उत्पादन के दौरान जो भी कमियां जैसे स्कैच, गलत साइज, कलर की गलती आती है उसे टेली मार्क्स लगाकर नोट किया जाता है।
इसमें डाटा को आसानी से और बिना गलती के रिकॉर्ड किया जाता है।

2 फिशबोन डायग्राम –
यह डायग्राम मछली के आकार का होता है इसमें उत्पाद में गड़बड़ी की असली वजह को जाना जाता है। इसमें असली वजह जानने के लिए 6 m का सहारा लिया जाता है चलो तो पहले हम यह 6 एम क्या है यह जानते हैं –

1 Machine ( मशीन)-
काम में उपयोग होने वाली मशीन में खराबी या पुरानी तकनीकों का उपयोग।

2 method ( तरीका)
इसमें कम करने के तरीके को देखा जाता है कि कही उत्पाद में कमी का कारण उत्पाद के तरीके में तो नहीं है।

3 manpower ( इंसानी ताकत)
इसमें काम करने वाले लोगों की स्किल्स और इसको मैनेज करना वाले ऑपरेट की गलतियों के कारण को खोजा जाता है।

4 material ( सामग्री)
कही उत्पादकता में गलत सामग्री का इस्तेमाल तो नहीं किया गया यह देखा जाता है।

5 measurement ( नाप)
इसमें यह देखा जाता है कि उत्पाद के लिए जो माप लिया गया है वह सही है या गलत।

6 environment ( तापमान)
इसमें तापमान को देखा जाता है कि काम की जगह का तापमान कैसा है वह नमी, धूप कैसी है।

3 पारेटों चार्ट –
इसमें एक बार ग्राफ बनाया जाता है और समस्याओं को उनकी घटते क्रम में लगाया जाता है और पता किया जाता है कि सबसे बड़ी समस्या क्या है। इससे हमे यह पता चलता है कि सबसे पहले किस समस्या को ठीक किया जाए।

4 हिस्टोग्राम –
इसमें वस्तु की भिन्नता का समझने में मदद मिलती है इसमें भी एक बार चार्ट तैयार किया जाता है और समस्या को फैला कर दिखाया जाता है।

5 कंट्रोल चार्ट –
यह एक लाइन ग्राफ होता है जो चलती हुई मशीन में बता देता है कि उत्पाद में कहा डिफेक्ट आ रहा है।

6 स्कैटर डायग्राम –
यह दो चीजों के बीच संबंध बताने वाला चार्ट है यह हमे बताया है कि तापमान के बढ़ने या घटने से उत्पाद पर क्या असर हो रहा है इससे हमे यह पता चलता है कि एक चीज में बदलाव से दूसरी चीज पर क्या असर हो रहा है।

7 स्ट्रैटिफिकेशन –
यह पूरे संचालन को स्टेप बाय स्टेप दिखाता है जिससे हमे पता चलता है कि किस विशिष्ट शिफ्ट, मशीन या संचालन स्टेप में सबसे ज्यादा समस्या हो रही है।

क्वालिटी कन्ट्रोल टूल्स (7 टूल्स)

क्वालिटी कन्ट्रोल टूल्स 7 टूल्स

निष्कर्ष –
यह 7 Qc केवल डेटा इकठ्ठा नहीं करते बल्कि यह समस्या को समझने और उसमें सुधारने में मदद करते हैं। यह उत्पाद की गुणवत्ता को समझने में मदद करते हैं इन 7 QC ने कंपनियों को ब्रांड बनने में बहुत योगदान दिया है। इससे लोगों का कंपनियों पर भरोसा बढ़ा है।

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