आज हम ISO 9001और IATF 16949 जो कि जीके बारे में सरल शब्दों में जानने की कोशिश करेंगे
जब भी हम कोई भी सामान अपना घर लाते है तो पहले देखते है कि उसकी एक्सपायरी डेट क्या है उसके गुणवत्ता मानक क्या है फिर हम उस वस्तु को खरीदते है
इसी तरह फैक्ट्रियों में बन रही वस्तु की गुणवत्ता की जाँच की जाती है उसके लिए कई जाँच एजेंसी बनाई जाती है हम उन्हीं प्रमुख के बारे में जानेंगे।
1 , ई एस ओ –
इसका पूरा नाम इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर स्टैंडर्डाइजेशन है। यह एक गुणवत्ता जाँच करने का सामान्य मानक है जब भी किसी वस्तु का निर्माण किया जाता है उसे इस मानकों पर खरा उतरना पड़ता है
नतभी वह बाजार में ग्राहकों के पास भेजा जाता है यह उत्पादन के क्षेत्र में जैसे ( प्लास्टिक, स्टील, पैकेजिंग) आदि में लागू होता है।

० यह उत्पादन क्षेत्र में कैसे काम करता है ०
* नियम प्रणाली तैयार करना –
यह हमे बताता है कि वस्तु के निर्माण में कच्चे माल से लेकर तैयार माल के बाहर जाने तक एक लिखित प्रकिया हो।
* वस्तु में दोषों को कम करना –
उत्पादन के समय होने वाली कमियों को पहचानना और उन्हें फिर से ना होने देना।
* ग्राहकों की संतुष्टि –
यह, यह सुनिश्चित करता है कि ग्राहकों को हर बार समान गुणवत्ता का माल मिले उन्हें माल में कोई शिकायत ने हो।
* निरंतर सुधार –
यह फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता को बढ़ाता है और उसमें सुधार करता है।
2 आई ए टी एफ –
आई एस ओ जहां हर वस्तु के निर्माण में लागू होता है वही यह आई ए टी एफ विशेष रूप से ऑस्टोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग में तैयार माल की जाँच करता है जैसे गाड़ी के पार्ट्स।
जब आई ए टी एफ को लागू किया जाता है तो उसमें आई एस ओ के मानक पहली से शामिल होने चाहिए।

० मैन्युफैक्चरिंग ने यह क्यों सख्त माना जाता है????
क्यों कि यह ऐसे वस्तु के निर्माण के मानक तय करता है जिनमें थोड़ी सी गड़बड़ी से ही इंसान कि जान को खतरा हो सकता है। यह बहुत सख्त नियम तय करता है –
* शून्य खराबी –
यह तय करता है कि वस्तु के निर्माण के समय ही सारी कमियों को दूर किया जाए बाद में इसमें शून्य खराबी हो मतलब कोई खराबी होनी ही नहीं चाहिए।
* ट्रैसेबिलिटी –
ट्रैसेबिलिटी से यह पता लगाया जा सकता है यदि कभी किसी गाड़ी के पार्ट्स में की खराबी आती है तो यह पता लगा सकते है कि यह कब किस मशीन के जरिए ओर किस ऑपरेटर की मदद से किस कच्चे माल से बनाया गया था।
* आना वाले खतरों को मैनेज करना –
मशीनों के खराब होने से पहले ही उनकी खराबी का पता लगाना और जोखिम को कम करना।
० आई ए टी एफ 16949 में इस्तेमाल होने वाले 5 मुख्य टूल्स…….
1 APQP( Advanced product quality planning)-
APQP में वस्तु के निर्माण करने से पहले उसकी पूरी प्लानिंग की जाती है कि उसमें किस कच्चे माल से लेकर ग्राहक तक पहुंचने तक।
2 FMEA( failure mode and effects analysis)-
उत्पाद वस्तु और बनाने की प्रक्रिया में क्या क्या गलती हो सकती है उन्हें पहले से पहचानकर रोकना।
3 PPAP ( production part approval process)-
जब भी कोई बड़ा उद्योग करना हो उससे पहले ग्राहकों से सैंपल और प्रकिया अप्रूवल लेना।
4 SPC ( statistical process control)-
इसमें डाटा और चार्ट बना कर यह देखा जाता है कि मशीन और प्रोसेस कंट्रोल में है कि नहीं।
5 MSA ( measurement system analysis)-
MSA में यह देखा जाता है कि जिन तकनीक से हम वस्तु की गुणवत्ता की जाँच कर रहे है वह सही परिणाम दे रहे है या नहीं।
निष्कर्ष –
आई एस ओ 9001 और आई ए टी एफ यह दोनों ऐसे नियमों का निर्माण करते है जिन पर खरा उतरने के बाद ही किसी वस्तु के उत्पादन करने और ग्राहक तक पहुंचाने की अनुमति दी जाती है।